पनघट

एक दिन मैं बैठी थी पनघट परतब मेरी उदास आँखें आयीं भरआँखों से आँसू बहने लगे झटझटयाद करके वह दिन जिसका गवाह है पनघट वह सब मेरे बचपन के दिनों की यादनाना के संग यहाँ आती थी दोपहर के बादमेरी झूमती पायल की आहट…