इससे बढ़िया और क्या हो सकता है.........
बरसता सावन हो और हाथ में हो गरम चाय का प्याला
कडी़ धूप में चलते हों और ‘लिफ़्ट’ दे कोई पहचानवाला
कडा़के की ठंड़ में एन. आर. आई. चाचा सौगात में दें एक गरम ऊनी कोट
ठीक फ़िल्म जाने के पहले नानी हाथ में थमा दे बीस रुपये की नोट
बगलवाली सीट पर आकर बैठे़ वही जो दिल में समाया हो
किसी दोस्त की बहुत याद आती हो और उसी दिन उसका खत आया हो
कभी मन उदास हो और दराज़ में से वर्ड्सवर्थ की डैफ़ोडिल्स मिले
ऐसा लगे जैसे बादलों के बीच से इन्द्रधनुष निकले
शतरंज खेलते खेलते बढ़िया चाल दिख जाए
डरते डरते नन्हा निकू सायकल सीख जाए
वैलेन्टाइन्स डे पर वह स्वीकार करे तुम्हारा लाल गुलाब
इंतिहान में सही आये हों लगभग सारे जवाब
परदेस में बैठे हों और याद आये देस की मिट्टी
आँखें भर आयें हँसते हँसते पढ़कर माँ की चिट्ठी
इन छोटी खुशियों को भुलाकर हम छोटे गम याद करते हैं
हर पल में आनंद जो होता है, क्यों उसे बरबाद करते हैं?
क्यों न हम हर पल को अपना बना दे?
ज़िन्दगी यह छोटी सी है, आओ इसको सजा दे.
बरसता सावन हो और हाथ में हो गरम चाय का प्याला
कडी़ धूप में चलते हों और ‘लिफ़्ट’ दे कोई पहचानवाला
कडा़के की ठंड़ में एन. आर. आई. चाचा सौगात में दें एक गरम ऊनी कोट
ठीक फ़िल्म जाने के पहले नानी हाथ में थमा दे बीस रुपये की नोट
बगलवाली सीट पर आकर बैठे़ वही जो दिल में समाया हो
किसी दोस्त की बहुत याद आती हो और उसी दिन उसका खत आया हो
कभी मन उदास हो और दराज़ में से वर्ड्सवर्थ की डैफ़ोडिल्स मिले
ऐसा लगे जैसे बादलों के बीच से इन्द्रधनुष निकले
शतरंज खेलते खेलते बढ़िया चाल दिख जाए
डरते डरते नन्हा निकू सायकल सीख जाए
वैलेन्टाइन्स डे पर वह स्वीकार करे तुम्हारा लाल गुलाब
इंतिहान में सही आये हों लगभग सारे जवाब
परदेस में बैठे हों और याद आये देस की मिट्टी
आँखें भर आयें हँसते हँसते पढ़कर माँ की चिट्ठी
इन छोटी खुशियों को भुलाकर हम छोटे गम याद करते हैं
हर पल में आनंद जो होता है, क्यों उसे बरबाद करते हैं?
क्यों न हम हर पल को अपना बना दे?
ज़िन्दगी यह छोटी सी है, आओ इसको सजा दे.