यादें

वक्त बदल जाता है,बदलते बदलते दे जात है यादें……सिर्फ़ यादें
यादें……..
किसी आम की, किसी खास की
किसी मकाम की, किसी अह्सास की

आवाज़ और नज़र के दायरे से दूर
सब बेहे जात है करके हमें मजबूर
और रेहे जाति हैं यादे सिर्फ़ यादें

यादें ……
किसी डगर की, किसी सफ़र की
किसी शेहेर, पेड और मकान की
किसी जहां की, किसी आसमान की
बारीश, सर्दियां और बहार की
किसी दर्द की, किसी प्यार की
किसी नज़र की, किसी मुस्कान की
किसी अन्जान की, और………..
किसी अपना सा लगनेवाले इन्सान की

बस जाते हैं ये सब
दिल में अहसास बनकर
होठों पर मुस्कान बनकर सजते हैं
और आंखों से बूंदें बनकर बरस्ते हैं

समय बेहे जाता है और छोड जात है यादें …..सिर्फ़ यादें

8 Comments on “यादें

  1. अच्छी शुरूआत है बस लिखते रहिये जो छोटी मोटी टाईपिंग की गलती हैं अपने आप ठीक हो जायेंगी, वैसे आज के दौर को देखते हुए गलती जानबूझ के छोडना बुद्धिमानी का काम है

  2. सुन्दर कविता सोनल जी। हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका हार्दिक स्वागत हैं।

    सोनल जी परिचर्चा हिन्दी फोरम की भी सदस्या बन जाइए। हिन्दी लेखन संबंधी किसी भी सहायता के लिए इस सबफोरम तथा ब्लॉग संबंधी किसी भी सहायता के लिए इस सबफोरम में सहायता ले सकती हैं।

  3. कविता अच्छी लगी । वर्तनी(हिज्जे) पर थोड़ा ध्यान दीजिए।

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